Assessment of land ownership rights on the basis of epigraphical evidences of bhumidāna during Gurjara Pratihāra period

Manaviki (January-June 2018) ISSN : 0975-7880 371Dr. Rajeev PratapAssistant Professor, Amity University, Uttar PradeshThe period of my interest i.e. Gurjara-Pratihāra period covers quiet a longperiod from c.750A.D. - 1000A.D. This…

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आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास: धर्म की नवीन व्याख्या

ैीवकी क्तपेीजप ;।द प्दजमतदंजपवदंस त्ममितममक त्मेमंतबी श्रवनतदंसद्धए टवसण् 8ए छवण् 4ए ।चतपस.श्रनदमए 2017 प्ैैछ रू 0976.6650213आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास: धर्म की नवीन व्याख्याडॉ0 मनीषा सिंह’“अगर निरंतर व्यवस्थाओं का…

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’आवां’ के निहितार्थ – जितेन्द्र श्रीवास्तव

चित्रा मुद्गल ने 25 अक्टूबर, 1964 (नवभारत टाइम्स, मुम्बई में प्रकाशित पहली कहानी - सफेद सेनारा) से अब तक लगभग पचपन वर्षों में जो सर्जनात्मक यात्रा की है, वह उल्लेखनीय…

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