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भारत की अखण्डता को सुदृढ़ बनाने के बदले स्वाधीनता प्राप्‍ति के प्रथम दशक में ही भारतीय भाषाओं में विभेद मानकर भाषा वार राज्यों के पुनर्गठन का राष्ट्रघाती प्रयास प्रारंभ होने लगा। इससे भारत के राज्यों में परस्पर दूरी बढ़ती, भारत राष्ट्र की अखण्डता संकटग्रस्त होता। लेकिन जब यह कार्य प्रारंभ हुआ चारों ओर उपद्रव होने लगा और तत्कालीन केन्द्र सरकार विवादों में घिर गई। इतिहास का हिस्सा बन चुके इस प्रकरण से ज्ञात होता है कि भारतीय भाषाओं के विविध रूपों में गहरी एकात्मता है और इससे सांस्कृतिक शक्‍ति की अभिव्यक्‍ति होती है। भाषा ही संवाद का माध्यम बनती है…

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31 अगस्त 2020 को राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन ने राष्ट्रीय आय लेखा के आंकड़े जारी किए। जो सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी का आंकड़ा जारी किया गया है वह अर्थव्यवस्था के गहरी मंदी में जाने का संकेत बताया जा है। पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 8.1% की वृद्धि की तुलना में इस वर्ष वास्तविक जीडीपी में 22.6% की गिरावट ने जुलाई और सितंबर की तिमाही पर लोगों की उत्सुकता को बढ़ा दिया है। क्योंकि यदि इस तिमाही में भी अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई तो तकनीकी रूप से, आधिकारिक रूप से,अर्थव्यवस्था मंदी में कही जाएगी । इससे पहले 1979 में भारतीय…

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जनवरी के अंत में हुए वर्ल्ड इकोनामिक फोरम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े गर्व से भारत के कोरोना वायरस पर जीत की घोषणा की थी। जनता तो इससे भी कुछ महीने पहले ही अपने कार्य व्यवहार से इस विजय की घोषणा करती दिखी। लोग देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बिना किसी सतर्कता के पार्टी मनाते, घूमते नजर आए। दीपावली, क्रिसमस, होली में जमकर बाजारों में खरीदारी हुई। लोग बिंदास थे। वैसे अक्टूबर-नवम्बर से जब कोरोना के संक्रमण में तेजी से कमी आने लगी तभी शायद सरकारों ने यह समझ लिया था कि उसने कोरोना के विरुद्ध…

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2015-16 से 2020-21 के  मध्य उत्तर प्रदेश के शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद में वार्षिक चक्रवृद्धि दर 8.42 प्रतिशत रही। राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी कोविड19 का नकारात्मक असर पड़ा है और वित्त वर्ष 2020-21 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 6.4 प्रतिशत की कमी आयी, जबकि वर्ष 2019-20 में भी संवृद्धि दर मात्र 3.8 प्रतिशत थी। सबसे ज्यादा चिंता की बात राज्य के विनिर्माण क्षेत्र में आई गिरावट है जोकि 2019-20 में – 3.5 प्रतिशत और 2020-21 में – 5.4 प्रतिशत थी। राज्य सरकार के अनुसार 2020- 21 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 19,40,527 करोड रुपए हो जाने…

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केंद्र सरकार पिछले कुछ महीनों से अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए लगातार ऐसे कदम उठा रही है जो कि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे, और साथ ही यह कदम आर्थिक सुधारों को भी आगे बढ़ाने वाले हैं। यह भी एक बड़ा कारण है कि कोविड-19 से जूझ रही अर्थव्यवस्था के बावजूद शेयर बाज़ार लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है यह एक हद तक अर्थव्यवस्था में उद्योग जगत और निवेशकों के बढ़े हुए भरोसे को भी बताता है। मोदी सरकार में 2014 से ही वंचित वर्गों की बेहतरी के लिए उठाए गए थे। इनमें गरीबों के लिए आवास, शौचालय, बिजली, रसोई…

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भारत में ऊर्जा संकट कोई नया नहीं है भारत में हमेशा से ही ऊर्जा की आपूर्ति और मांग में काफी अंतर रहा है। 2011 में  मांग और पूर्ति में यह अंतर 8 से 9प्रतिशत  तक था लेकिन हाल के वर्षों में उत्पादन और आपूर्ति में वृद्धि के कारण यह उर्जा घाटा घटकर 1प्रतिशत  से कम रह गया है। परंतु इसका एक पहलू यह भी है कि भारत अपने जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। पेट्रोलियम पदार्थों से लेकर कोयले तक का आयात इस संकट को अर्थव्यवस्था के लिए और गंभीर बना देता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम…

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12 मई शाम आठ बजे राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”कोरोना संकट का सामना करते हुए नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थी, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे और आज जिस आर्थिक पैकेज का एलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब 20 लाख करोड़ रुपये का है। ये पैकेज भारत की जीडीपी का करीब-करीब 10 प्रतिशत…

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राजस्थान के श्रीगंगानगर में पेट्रोल की कीमत 17 फरवरी को बढ़कर 100 रूपये पार कर गई। यह लगातार दसवां दिन था जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही थी। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर हमारे देश में अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका असर पड़ना निश्चित है। पिछले 10 महीने में पेट्रोल की कीमत में 17 रूपये से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। हालांकि यह प्रीमियम पेट्रोल की कीमत है जो कि सबसे अधिक बढ़ी है, क्योंकि इस पर कर अधिक है। अलग-अलग राज्यों में पेट्रोलियम पदार्थों पर कर की दरें अलग-अलग हैं। इसलिए पेट्रोल…

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डॉ. उमेश प्रताप सिंह भूमिका 1991 में जिन आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई उसके बाद से अनेक क्षेत्रों में सरकारी हस्तक्षेप में कमी आई लेकिन बड़े किसानों की लाबी के दबाव के कारण ऐसा ही सुधार कृषि क्षेत्र में संभव नहीं हो सका। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्‍य रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने कई तरह की योजनायें शुरू की, जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, कृषि के लिए अधिक संस्थागत ऋण सुविधा और दालों का बफर स्टॉक बनाना आदि। इसी क्रम में सरकार ने कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार…

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डॉ विवेक कुमार निगमएसोसिएट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र विभाग)यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज, प्रयागराजनवीन कोरोना विषाणु के कोविड-19 प्रजाति के अतिसंक्रमणसील और अतितीव्र गतिसीलन के कारणभारतीय अर्थव्यवस्था पर न केवल प्रतिकूल प्रभाव पड़ा बल्कि कई प्रकार के दारूण दृश्य उत्पन्न हुए। संभवतःविकास के जिस मॉडल का अनुसरण हमने किया उसके कारण यह स्थितियां उत्पन्न हुई और परिणाम यह हुआकि जब आर्थिक गतिविधियां रुकी तो बड़े पैमाने में लोगों का रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले स्थानों(महानगरों) से ग्राम क्षेत्रों की ओर बहुत बड़ी मात्रा में पलायन हुआ।अब इस परिस्थिति में भारत सरकार ने न केवल बेरोजगार हुए लोगों अपितु लघु एवं कुटीर उद्योगचलाने वाले…

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