समसामयिक संवाद – स्वदेशी, स्वावलंबन एवं विदेशी निवेश

सञ्ज्ञार्थं शोध प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित समसामयिक संवाद पर राष्ट्रीय वेबिनार:

विषय: स्वदेशी, स्वावलंबन एवं विदेशी निवेश

दिनांक:    3 जून 2020 

समय :     4:45 बजे सांध्य

वक्ता :

      1)  आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी, राष्ट्रवादी विचारक, पूर्व कुलपति, 

            अर्थशास्त्री

      2)  डॉ विवेक कुमार निगम एसोसिएट प्रोफेसर,

            अर्थशास्त्र विभाग ईसीसी इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज

कृपया इस लिंक पर 03 जून 2020, समय : शाम 4:45 बजे Zoom Meeting पर जुड़े ।

Meeting ID: 320 573 4358
Password: 029993
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                                                 स्वदेशी, स्वावलंबन एवं विदेशी निवेश:

एक राष्ट्र की संप्रभुता उसके स्वावलंबन में निहित होती है। यदि एक राष्ट्र आर्थिक रूप से अन्य राष्ट्रों पर निर्भर है तो यह उसकी संप्रभुता पर प्रश्नचिन्ह है।

स्वदेशी की अवधारणा हमें स्वावलम्बन की तरफ अग्रसर करती है। स्वदेशी आंदोलन का स्वतंत्रता संग्राम जो महत्वपूर्ण योगदान रहा है उसे कभी विस्मृत नही किया जा सकता।

समसामयिक वैश्विक संकट और चीन जैसे पड़ोसी देश की अराजक नीति को देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि भारत अपनी संप्रभुता को सशक्त व सुरक्षित बनाए रखने के लिए स्वावलम्बित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए स्वदेशी के मार्ग पर प्रतिबद्ध हो । ऐसी स्थिति में वैश्विक परिदृश्य के आलोक में स्वदेशी के स्वरूप पर संवाद जरूरी हो जाता है । इसके साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के स्वदेशी आंदोलन और आज के परिदृश्य में स्वदेशी की अवधारणा के अंतर को भी समझा जाना जरूरी है ।
भारत का बाजार एक मजबूत पक्ष है। यह विदेशी निवेश को भारत की तरफ आकर्षित करता है। सुविचारित विदेशी निवेश स्वावलम्बन के रास्ते मे कैसे सहयोगी बने इस पर विचार अवश्यम्भावी है। हमारे पास कुशल और सस्ता श्रम उपलब्ध है साथ ही एक बड़ा बाजार भी है। अतः भारत एक उत्पादक और आत्मनिर्भर देश बनने की पूरी क्षमता रखता है। अब ज़रूरत इस बात की है कि इस क्षमता को किस प्रकार कार्यान्वित किया जाय।
इस समसामयिक संवाद का एक केंद्र यह भी है कि स्वदेशी मॉडल और विदेशी निवेश के कुशल संयोजन द्वारा भारत स्वावलम्बन की तरफ कैसे अग्रसर हो और वैश्विक परिदृश्य में अपनी सकारात्मक निर्णायक भूमिका कैसे शुनिश्चित करे।
वैश्विक महामारी के संकट के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के एक अवसर के रूप में कैसे देखा जाना चाहिए। क्या इसके लिए सरकार को अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार की नीतियां बनानी चाहिए? विषय के इन बिंदुओं के आलोक में प्रोफेसर ए डी एन वाजपेयी और डॉ विवेक कुमार निगम अपने चिंतन से हमें लाभान्वित करेगें।

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आप सादर आमंत्रित हैं।

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